Published 2024-11-27
Keywords
- ज्ञान का सृजन,
- व्यवहारिक जीवन के अनुभवों,
- पाठ्यक्रम के संबोधों का शिक्षण
How to Cite
Abstract
विद्यालय में शिक्षकों द्वारा बच्चों के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार करने, उनके साथ घुल मिलकर उनकी व्यक्तिगत और सीखने संबंधी कठिनाइयों का समाधान करने से बच्चों की झिझक दूर होती है, उनकी अंतर्निहित क्षमता उभरने लगती है और वे आगे बढ़ते जाते हैं। इससे बच्चों में समूह में कार्य करने की क्षमता का विकास होता है तथा कक्षा में लोकतांत्रिक वातावरण का निर्माण होता है। बच्चों के परिवेश और व्यवहारिक जीवन के अनुभवों से जोड़कर पाठ्यक्रम के संबोधों का शिक्षण कराया जाए तो सीखने की प्रक्रिया सरल हो जाती है। इससे बच्चों को स्वयं करके सीखने के अवसर प्राप्त होते हैं जिससे ज्ञान का सृजन होता है। इसके लिए परिवेश के भौतिक तथा मानवीय संसाधनों का समुचित उपयोग करना समीचीन रहता है। इसे शिक्षण सूत्र के रूप में अपनाना चाहिए। प्रस्तुत अनुभव इसी समझ को रेखांकित करता है।